Friday, May 13, 2011

गौमाता की आरती



"जीवन देनेवाली माता हमें कुछ महीने दूध पिलाती है, परन्तु गौमाता जीवन भर.."अपने मित्र अनूप खत्री के साथ कनखल के एक आश्रम में सुनी कुछ पंक्तियाँ मेरे भावों में इस तरह प्रस्तुत हैं :               
                                                               गौमाता की आरती
जै- जै गौमाता
मैया जै- जै गौमाता
ब्रह्म यज्ञ से जन्मी
दिव्य मुक्तिदाता 
जै- जै गौमाता...
पावनता वो पायी
देवन दास कियो
मैया देवन दास कियो
जो भी शरण तिहारे
नहीं निराश कियो 
जै- जै गौमाता..
आगम-निगम बखानें 
वेद सुयश गायें 
मैया वेद सुयशगाएँ
पञ्च-गव्य धरती पर 
अमरित ये बताएँ 
जै- जै गौमाता..
तुम भूमि सशरीरा
सींगन शिव सोहे
मैया सींगन शिव सोहे
सरल सुभाव तिहारो
सबको मन मोहे    
जै- जै गौमाता..
पंचगव्य सो होवे
होम योग सारे
मैया होम योग सारे
जो जन सेवा करता
तीन ताप हारे      
जै- जै गौमाता..
कामधेनु की भांति
पूर्ण करतीं इच्छा
अंतकाल में करती
रौ-रव से रक्षा      
जै- जै गौमाता..
गौमाता की महिमा
जो अशोक गाये
ब्रह्मा-विष्णु-शिव से
इच्छित वर पावै   
जै- जै गौमाता..

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