Friday, April 29, 2011

हरिद्वार में मीडिया महाकुम्भ


इन दिनों हरिद्वार में कुम्भ मेला के दौरान कलम और कैमरे के महायोद्धाओं का भी मेला लगा हुआ है प्रत्येक टेलीविज़न चैनल, चैनल पर प्रसारित होनेवाले कार्यक्रमों के प्रमुखों, सितारों, एंकरों और अख़बारों, पत्रिकाओं और इन्टरनेट समाचार माध्यमों के लिखाडियों, जुगाडियों तथा धुरंधरों की फौज को देखकर सभी सकते में है अजब भगदड़ है हरेक मीडियाकर्मी सिर्फ हर की पैडी पर ही कवरेज करना चाहता है यह तादाद इतनी बड़ी है कि किसी की समझ में नहीं रहा कि इतनी बड़ी मीडिया सेना को कैसे और किस तरह से हर की पैडी क्षेत्र में खपाये पहली बार कुम्भ मेला में मीडियाकर्मियों के लिये बड़े पैमाने पर व्यवस्थाएं कराई गयी हैं

हर की पैड़ी के निकट स्थित केन्द्रीय नियंत्रण कक्ष (सीसीआर) के पार एक किलोमीटर पर ही चंडी देवी मंदिर की ओर नीलधारा के पास उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निश्शंक द्वारा लोकार्पित एवं २४ घंटे खुला मीडिया सेंटर बनाया गया है, जहाँ मुफ्त उपलब्ध १०० ब्रॉडबैंड इन्टरनेट कनेक्शन, १० फैक्स, १० कलर तथा ब्लैक एंड व्हाइट फोटोस्टेट मशीनें और १० स्कैनर्स, अति आधुनिक रेकॉर्डिंग, नॉन लीनियर एडिटिंग और सैटलाइट अपलिंकिंग की सुविधायुक्त स्टूडियो, ८०० वाहनों की मुफ्त पार्किंग, लगभग ३०० पत्रकारों हेतु मुफ्त रिहाइश तथा अत्यंत किफायती दामों पर नाश्ता, भोजन, चाय, काफी तथा पे पदार्थ की व्यवस्था है

उत्तराखंड शासन ने कुम्भ के इतिहास में पहली बार कई नये प्रयोग किये हैं शासन ने हर की पैडी पर तीन स्थाई कैमराटीम और पांच रिपोर्टिंग टीम के माध्यम से हर की पैडी क्षेत्र का निरंतर और निशुल्क कवरेज़ पूरे संसार में कहीं भी मुफ्त डाउनलोड करने तथा बिना रॉयल्टी उसके प्रसारण की अनोखी व्यवस्था तक कर रखी है, मगर हरिद्वार में डेरा डाले हर अखबार, पत्रिका और चैनल के स्थानीय, जिलास्तरीय, राज्यस्तरीय और मुख्यालय के प्रतिनिधि और कैमरामैन बज़िद हैं कि वह एक्सक्लूसिव तथा लाइव कवरेज़ करेंगे
मीडिया दिग्गज मानने को तैयार ही नहीं कि पूरे दिन चलनेवाले मुफ्त प्रसारण से भी वह दृश्य काट- छांट सकते हैं और उन्हें अन्य घाटों पर आये तीर्थार्थियों के साथ बात करके प्रस्तुत कर सकते हैं जिस किसी को भी रुकावट का सामना करना पड़ता है वह सीधे ऊपर फ़ोन मिला डालता है दिक्कत यह है कि मीडियावालों को बेइज्जत होने का तजुर्बा नहीं है और पुलिस को इज्ज़त देने का

कई राज्यों से आयी और कुम्भ में खराब मौसम में ड्यूटी कर रही पुलिस अपनी महान परम्पराओं पर कायम हैं और 'जो मिले उसे नापदो ', 'मारो और धकियाओ' और 'पासधारियों की मत सुनो' जैसे फार्मूले हुए है जिस पुलिसवाले की जैसी और जहाँ चलती है, वैसी ही वह चलता है इन हालात में पुलिस प्रशासन और मीडिया के टकराव के तमाम अप्रिय मौके भी पैदा हो रहे
हैं
मीडिया का कहना है कि मुख्य स्नान पर्वों से पहले हर की पैड़ी पर ३० मीडिया कर्मियों के लिये हर की पैड़ी पर मालवीयजी और शंकराचार्यजी की मूर्तियों के बीच एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनवाना चाहिये जिसके नीचे से यात्री आते रहें मीडिया की आपत्ति है कि कुम्भ में मीडिया की ज़रूरतों का ध्यान सही तरह से नहीं रखा गया वीआईपी, महिलाओं और विकलांगों के लिये घाट और पुल बने हैं मगर मीडिया के लिये अलग व्यवस्था की नहीं सोची गयी वे मीडिया सेंटर और वहां की गयी तमाम व्यवस्थाओं को अपनी ज़रूरतों के लिये नाकाफी मान रहे हैं जबकि पूरे विश्व में मीडिया के लिये अब उसी तरह की तकनीकी का प्रचलन बढ रहा है, जो हरिद्वार में इस्तेमाल हुई है

पुलिस अधिकारी अभी से मान रहे हैं, 'इस बार कुम्भ मेले में अगर कुछ भी गड़बड़ होगी तो उसकी जिम्मेदारी मीडिया और सूचना विभाग की होगी' वह मानने को तैयार नहीं कि संसार में आज तक ऐसा नहीं हुआ है संसार में कहीं भी अगर आतंकवादी पत्रकार या फोटोग्राफर बन कर घुसे हैं तो उनके पीछे किसी भी नामी गिरामी बैनर का हाथ नहीं था अलबत्ता अपनी ड्यूटी गैरजिम्मेदाराना तरीके से निभानेवाले लोग थे
देखना यह है कि मीडिया बनाम पुलिस बनाम प्रशासन के बीच बिना सहयोग और सहानुभूति के सिद्धांतों के यह कुम्भ मेला कब तक सिर्फ देवभूमि उत्तराखंड के सौभाग्य के सहारे चलता है? वैसे ईश्वर की कृपा से अभी तक के सभी स्नान निशंक संपन्न हुए हैं